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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Sunday, April 7, 2024

नमी

मेरे चेहरे से न तू पढ़ मुझे 
मेरा चेहरा जिल्द-ए-किताब है 
मेरी ज़िन्दगी के सफ़े पलट 
फिर पूछ जो भी सवाल हैं 
[जिल्द-ए-किताब = book cover], [सफ़े = pages]

न करो ये दिखने की कोशिशें 
यहाँ दिखना चश्मे सराब है 
तेरी रौशनी को ख़बर नहीं 
यहाँ ज़ुल्मतों के हिजाब हैं 
[चश्मे सराब = like mirage], [
ज़ुल्मतों के हिजाब = cover of darkness]

मेरे ज़ख्म का ना हिसाब ले 
मेरे ज़ख्म तो बे-हिसाब हैं 
तू कहे तो और सवाँर लूँ 
मेरे ज़ख्म मेरा शबाब है
[
शबाब = youth]

कोई कह रहा था के ज़िन्दगी 
एक ला जवाब सा ख़्वाब है 
इस ख्वाब में सच कुछ नहीं 
और जिस्म सारे हबाब हैं
[
हबाब = bubble]

क्या कहूं मैं कैसे कहूं उसे 
मुझे दिखता कैसा ये ख़्वाब है 
कहीं नम सी आँख में खून है 
कहीं जुस्तजू में शराब है
[
जुस्तजू = desire]

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ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...