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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Saturday, May 11, 2024

तेरी पनाहों में

हँसी .... 
आ ही जाती है 
यूँ चिढ़ाने से 
मुस्कुराने से 
गुदगुदाने से 

आओ खेलें साथ 
ले लें ये आकाश 
अपनी बाहों में 

खुशी ..... 
आ ही जाती है 
मुस्कुराने से 
खिलखिलाने से 
हँसते जाने से 

देख ये रौनक 
बाजे रे ढोलक 
जीवन आँगन में 

मदहोशी ..... 
आ ही जाती है 
तेरे आँचल में 
लेट कर उसमें 
सर छुपाने से 

जोने दे तुझको 
सोने दे मुझको 
तेरी पनाहों में 


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