ये वक़्त है
किसे पता
ये एक लफ्ज़
कब का है
ये वक़्त है
तुझे मिला
बस एक दिन
शब् का है
ये वक़्त है
मगर सदा
निकल चुका
सब का है
ये वक़्त है
ये रास्ता
बुना हुआ
रब का है
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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