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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Tuesday, May 14, 2024

जाएज़ा

हर कोई अच्छा भी है सच्चा भी है और है भला 
एक हम बेज़ार ज़ालिम हैं जहन्नम की तरह 

बस ज़मीं पे कुछ लक़ीरें खींच कर कहते हैं लोग 
अब से ये है मुल्क मेरा, मुल्क वो अबसे तेरा 

है ज़रूरी मुस्कुराना एक गुड़िया की तरह 
आग है हर दिल में बस उठता नहीं कोई धुआँ 

हर कोई चाहता है कहना अपनी अपनी दास्ताँ 
सबके अपने ज़ख़्म अपने दर्द, अपने हैं निशाँ  

कुछ शिकन हो तो इबारत का पता चलता भी है 
मौत है शक्लों पे जिनकी कौन दे उनको दवा 

जाएज़ा अपना लिया महसूस दुनिया से हुआ 
सबकी अपनी है जुबां और सबके अपने हैं बयान 

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