फ़िक्र दुनिया तुझे सताती क्यूँ है
इस तरह ख़ुद को जलाती क्यूँ है
हम तो जी लेंगे तरीके अपने
यूँ ज़माने को रुलाती क्यूँ है
छोड़ जाना है एक दिन तो बता
पास अपने तू बुलाती क्यूँ है
दिन गए जो बात कर उनकी
मखमली याद दिलाती क्यूँ है
हाथ छूटे हैं जबसे सोचता हूँ
दोस्ती हाथ मिलाती क्यूँ है
किसी बच्चे ने माँ से पूछ लिया
मुझको तू दूध पिलाती क्यूँ है

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