मेघ के वर्षा जल से सींचो
सींचो जड़ और तन
चक्षु के जल से फिर सींचो
अपना आत्मन
बिजुरी चमके सत्य दिखावे
सत के कर दर्शन
कभी कभी आए जीवन में
वर्षा का मौसम
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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