मन चंचल चपल अभिमानी
एक ध्यान नहीं ध्यावत है
सकल विश्व की बात सुनत है
आत्म सूर न लगावत है
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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