जीवन क्या है मन की माटी
मन की माटी तन की माटी
चाहे कागज हो या पाटी
या फिर पर्बत या फिर घाटी
तरुवर हो फल चाहे पाती
सबके अंदर में है माटी
माटी खाकर बनती माटी
माटी बनकर खाती माटी
सोना कंकर गोबर चांदी
सब तो माटी है भई माटी
माटी से मिलकर है माटी
माटी के बिन सब है माटी
इसकी कोई नहीं है जाती
ये बस माटी है बस माटी
माटी माटी से उठी रे
माटी माटी मे मिल जानी
जीवन क्या है मन की माटी
मन की माटी तन की माटी
माटी माटी से उठी रे
माटी माटी मे मिल जानी

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