बात क्या है के परेशान मुझको होना है
जो कुछ मिला था यहाँ पर वही तो खोना है
दिन गुज़ारे हैं सुहाने किसी सफ़र की तरह
रात आती है देख अब तो मुझे सोना है
ये जो शुमार हैं हिसाब और किताबों में
इन्हें सुकून से जगना है और ना सोना है
ये उजालों में ताश कारी करते मिलते हैं
इनको रातों में अंधेरों में भार ढोना है || दिन गुज़ारे हैं....
फिर उजाला ये नए दिन की तरह आएगा
आशनाओं से मेरे फिर मुझे मिलाएगा
जो सो गए थे बीती रात वो भी आएंगे
यही लिखा है गर्दिशों में यही होना है || दिन गुज़ारे हैं....
मगर ये ज़िंदगी है घर है दिन में रहने को
सुकून से रहो औरों को चैन रहने दो
धूप आएगी तुझे तोहफे देके जाएगी
काम तेरा है के मिट्टी को बस भिगोना है || दिन गुज़ारे हैं....

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