किसी को आब ने मारा
किसी को प्यास ने मारा
कोई हसरत में जलता था
किसी को यास ने मारा
किसी को यार ने मारा
किसी को खास ने मारा
उसे तो इल्म भी ना था
जिसे एख़्लास ने मारा
किसी एहसास ने मारा
दिल-ए-उदास ने मारा
कभी दिलबर के बातों की
सर-ए-मिठास ने मारा
कभी तो वस्ल ने मारा
कभी फ़िराक़ ने मारा
कभी परवाने को उसके
दिल ए बकवास ने मारा
किसी को काश ने मारा
किसी को ताश ने मारा
जिसे सांसों की आदत थी
उसी को सांस ने मारा
About Me
- Vivek Pohre
- I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Wednesday, July 17, 2024
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ख़ामोशी
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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सब है पराया रख ना क्या है ग़म हैं किसी के अ पना क्या है उम्र गुज़ारी खुल गई आँखें उम्र गुज़ारी अब जागा हूँ उम्र गुज़ारी त...
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तेरी अदीम निगाहों ने बे पनाह किया बिना किये मुझे आगाह ही तबाह किया ये किस तरह कि है उल्फत के मेरी फ़िक्र नहीं न कैद ही किया मुझको न ही रियाह ...
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जब कभी तेरा ख़याल आता है जाने क्या दिल को हुआ जाता है वक़्त ठहरा हुआ सा लगता है तू मेरे दिल में समा जाता है ग़ैर लगती है ये दुनिया मुझ को तू सग...
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