यही सच है मैं नहीं हूँ तुम्हारे जैसा
कौन होता है ज़िन्दगी में किसीके जैसा
इक दफ़ा खुद को आइना तो दिखाओ ज़रा
इल्म होगा तुम्हें तू भी नहीं तुम्हारे जैसा
तुमने इक बात कही थी एक दिन पहले
आज कहते हो वाक़या न था कोई ऐसा
फिर बड़ी देर तक सोचा किया तुमको हमने
और मुझे मिल न सका कोई तुम्हारे जैसा
आपकी बात ख़यालों को तो हिजाब नहीं
झूठ सच है मगर सच का कोई जवाब नहीं
इक तरफ दार ही ले लो सताइश के लिए
जो कहेगा नहीं कोई भी तुम्हारे जैसा
यही सच है मैं नहीं हूँ तुम्हारे जैसा

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