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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Friday, August 30, 2024

ज़रा मुश्किल

Bahr: 1222 1222 1222 1222

ये सूरज आसमा में तो क़मर से रोज़ मिलता है  
मगर बादल जो आए तो ज़रा मुश्किल सी होती है 

ये माना दिल में रहते हो मेरी साँसों में बहते हो 
मगर देखे बिना तुझको ज़रा मुश्किल सी होती है 

सुनो बाग़ों की कलियों को उन्ही पौधों पे खिलने दो
गिरी कलियाँ खिलाने में ज़रा मुश्किल सी होती है 

दिवाली के चराग़ों को बिना भूले जला लेना 
अँधेरों में दिवाली हो ज़रा मुश्किल सी होती है 

तुझे कैसे बताऊँ तुम मेरे कुछ भी नहीं लगते 
मुझे ये बात कहने में ज़रा मुश्किल सी होती है

अगर हम भूल जाते तो बोहोत आसान हो जाता  
मगर ये भूल जाने में ज़रा मुश्किल सी होती है 



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ये सूरज रोज बे नागे चाँद को रोशन करता है  
मगर बादल आ जाए तो ज़रा मुश्किल सी होती है 
ये माना दिल मे रहते हो मेरी साँसों मे बहते हो 
मगर देखे बिना तुझको ज़रा मुश्किल सी होती है 

सुनो बाग़ों की कलियों को उन्ही पौधों पर खिलने दो
गिरी कलियाँ खिलाने में ज़रा मुश्किल सी होती है 
दिवाली के चराग़ों को बिना भूले जला लेना 
अँधेरों मे दिवाली हो ज़रा मुश्किल सी होती है 

तुझे कैसे बताऊँ तुम मेरे कुछ भी नहीं लगते 
मुझे ये बात कहने में ज़रा मुश्किल सी होती है
अगर हम भूल जाते तो बोहोत आसान हो जाता  
मगर ये भूल जाने में ज़रा मुश्किल सी होती है 

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