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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Wednesday, August 14, 2024

बात

बहरों के सामने तू आवाज़ क्या करेगा 
ख़ुद उड़ सके न उनको आज़ाद क्या करेगा 

चादर को ओढ़ते हैं अपना क़फ़न समझ कर 
तू उनसे ज़िन्दगी की फ़रियाद क्या करेगा 

इल्ज़ाम हर किसी पर लाज़िम नहीं है क्यों कि  
जो साथ ही नहीं था वो याद क्या करेगा 

मायूस है वो मुझसे ये सोच कर के मेरी 
बर्बाद ज़िन्दगी को बर्बाद क्या करेगा 

रेहमत उसे न बक्शो वेह्शी है वो दरिंदा 
पहले ही मर चुका है जल्लाद क्या करेगा 

साँसें ये चल रही हैं कह दे तू जो है कहना 
जो सांस रुक गई तो फिर बात क्या करेगा 

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