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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Sunday, August 11, 2024

सादा दिली

तस्वीर कैसी कैसी बनाता है आइना - २ 
ख़ाबों के जैसे अक्स दिखाता है आइना 
तस्वीर कैसी कैसी बनाता है आइना 

महफ़िल में इक दफ़ा भी मुझे देखता नहीं 
तन्हाईयों में मुझको मनाता है आइना
ख़ाबों के जैसे अक्स दिखाता है आइना 
तस्वीर कैसी कैसी बनाता है आइना 

मुझसे ही मांगता है रौशनी के सौ दिए 
एहसान मेरे मुझको गिनाता है आइना 
ख़ाबों के जैसे अक्स दिखाता है आइना 
तस्वीर कैसी कैसी बनाता है आइना 

रखा था कब से हमने संभाले जिस आग को 
आंसू की शक्ल उसको बुझाता है आइना 
ख़ाबों के जैसे अक्स दिखाता है आइना 
तस्वीर कैसी कैसी बनाता है आइना 

बातें बनाओगे वो भी तुम इसके सामने?
दुनिया की सारी बातें जानता है आईना
ख़ाबों के जैसे अक्स दिखाता है आइना 
तस्वीर कैसी कैसी बनाता है आइना 

सादा दिली मगर ये किसी को न आ सकी
कोई न चाह कर भी बन सका है आइना 
ख़ाबों के जैसे अक्स दिखाता है आइना 
तस्वीर कैसी कैसी बनाता है आइना 

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