आज बारिश के हैं आसार बोहोत
अश्क़ आँखों में हैं लाचार बोहोत
पत्थरों पर ही है शहर ये खड़ा
और पानी के तलबग़ार बोहोत
गाँव में मेरे बेक़रारी है
मेरी नज़रें हैं शर्मसार बोहोत
कैसी तहज़ीब क्या सियासत है
जिस तरफ देखो हैं मक्कार बोहोत
दिखाई मैंने चाँद की कलियाँ
उसने कहा है धब्बेदार बोहोत
ज़र्द ही ज़र्द देस में है मेरे
और हरियाली है उस पार बोहोत
और कितने तू लफ्ज़ माँगेगा
तेरी जुबां पे हैं उधार बोहोत
सच कहोगे तुम झूठी दुनिया से
हैं इरादे तेरे ख़ूंखार बोहोत
घाव अपने तो कम ही दिखलाना
मिलेंगे तुझको सलाहकार बोहोत
तेरे नसीब में लिखा क्या है
ये बताने को हैं तैयार बोहोत
फ़िक्र मेरी तो तुम ही करते हो
तुमसे देखे हैं होश-ए-यार बोहोत
वो ही जीतेगा अबकी बार यहाँ
जिसने देखी है अपनी हार बोहोत
मैं न आऊंगा बाज़ आदत से
इस ग़ज़ल में भी हैं अशआर बोहोत
अब कहीं जाना इतने बरसों में
हैं यहाँ पर भी कलमकार बोहोत

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