Bahr: 221 2122 221 2122
दुश्वारियों का मौसम बिलकुल अलग रहा है
बातों की बात ये के कोई तो ठग रहा है
करना तेरा वज़ाहत लाज़िम है यार लेकिन
आँखें तुम्हारी पढ़ कर कुछ और लग रहा है
इस बार कुछ न कहना बस बात मेरी सुनना
हर बार की तरह ये बेकार लग रहा है
कितने ही शायरों ने शब्बाब-ए-ज़िंदगी की
हब्बाब ज़िंदगी का कुछ और लग रहा है
ज़ाहिर सी बात है ये मालूम है मुझे भी
बातों से मेरी उनको कुछ और लग रहा है
ये रासते ठिकाना पहचान के हैं मेरे
आते थे हम यहाँ पर अक्सरहाँ लग रहा है
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दुश्वारियों का मौसम बिलकुल अलग रहा है
बातों की बात ये के कोई तो ठग रहा है
करना तेरा वज़ाहत लाज़िम है यार लेकिन
आँखें तुम्हारी पढ़ कर कुछ और लग रहा है
इस बार कुछ न कहना बस बात मेरी सुनना
हर बार की तरह ये बेकार लग रहा है
कितने ही शायरों ने शब्बाब-ए-ज़िंदगी की
हब्बाब ज़िंदगी का कुछ और लग रहा है
ज़ाहिर सी बात है ये मालूम है मुझे भी
बातों से मेरी उनको कुछ और लग रहा है
ये जगह ये ठिकाना पहचान के हैं मेरे
आते थे हम यहाँ पर अक्सरहाँ लग रहा है
दुश्वारियों का मौसम बिलकुल अलग रहा है
बातों की बात ये के कोई तो ठग रहा है

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