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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Monday, August 26, 2024

ठग

Bahr: 221 2122 221 2122

दुश्वारियों का मौसम बिलकुल अलग रहा है 
बातों की बात ये के कोई तो ठग रहा है 
करना तेरा वज़ाहत लाज़िम है यार लेकिन 
आँखें तुम्हारी पढ़ कर कुछ और लग रहा है

इस बार कुछ न कहना बस बात मेरी सुनना 
हर बार की तरह ये बेकार लग रहा है  

कितने ही शायरों ने शब्बाब-ए-ज़िंदगी की 
हब्बाब ज़िंदगी का कुछ और लग रहा है 

ज़ाहिर सी बात है ये मालूम है मुझे भी 
बातों से मेरी उनको कुछ और लग रहा है 

ये रासते ठिकाना पहचान के हैं मेरे 
आते थे हम यहाँ पर अक्सरहाँ लग रहा है 



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दुश्वारियों का मौसम बिलकुल अलग रहा है 
बातों की बात ये के कोई तो ठग रहा है 
करना तेरा वज़ाहत लाज़िम है यार लेकिन 
आँखें तुम्हारी पढ़ कर कुछ और लग रहा है 

इस बार कुछ न कहना बस बात मेरी सुनना 
हर बार की तरह ये बेकार लग रहा है 

कितने ही शायरों ने शब्बाब-ए-ज़िंदगी की 
हब्बाब ज़िंदगी का कुछ और लग रहा है 

ज़ाहिर सी बात है ये मालूम है मुझे भी 
बातों से मेरी उनको कुछ और लग रहा है 

ये जगह ये ठिकाना पहचान के हैं मेरे 
आते थे हम यहाँ पर अक्सरहाँ लग रहा है 

दुश्वारियों का मौसम बिलकुल अलग रहा है 
बातों की बात ये के कोई तो ठग रहा है 

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