क़िस्सों को कहानी में ढलते हुए देखा
और ऐसे हक़ीक़त को जलते हुए देखा
'इंसान हूँ' इंसान ये कहते हैं सर-ए-आम
कितनों को मैंने जिस्म बदलते हुए देखा
करते हैं जो शफ़्क़त की बातें बड़ी बड़ी
एक फूल उन्हें कल ही कुचलते हुए देखा
[ शफ़्क़त = करुणा, compassion ]
कल रात से भूखा था मैं अब भूख मर गई
इक तिफ्ल को खाने को तरसते हुए देखा
[ तिफ़्ल = बच्चा, child ]
एक बाप सर झुका के सुन रहा था कोई बात
उसे खून के प्यालों को निगलते हुए देखा
नज़रों के सवालों का जब जवाब ना मिला
मैंने तुझे नज़रों से उतरते हुए देखा

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