ये फ़नकारों की कहते हैं अलामती नहीं करते
दिल से करते हैं तारीफ़ें बनावटी नहीं करते
बड़ी खूबी से रखते हैं नाम सबका ये अज़मत से
ज़िया की आदत है ये भी ज़ियादती नहीं करते
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जो झलक भी न दिखाए तो फज़ल ही क्या है
जो समझ सबके ही आये वो अज़ल ही क्या है
जो तुझे सैर कराये ना हकीकत की तरह
जो तरन्नुम न सजाये वो ग़ज़ल ही क्या है

21-09-2024 Baithak Bangalore
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