- Behr 2122 2122 2122
After
शायरों की ये बुरी आदत है अक्सर
क़ैद करते हैं ये कुछ लफ़्ज़ों में मंज़र
और बातों को भुला देते हैं लेकिन
फ़लसफ़ों को लिख लिया करते हैं अक्सर
हम तो मैख़ाने को जाते ही नहीं हैं
तेरी आँखों से पिया करते हैं अक्सर
जिनकी बातों में कोई भी दम नहीं है
वो ख़ुदा की ही क़सम खाते हैं अक्सर
पैरहन अपने बनाते देखा जिनको
ज़ख़्म भी अपने सिया करते हैं अक्सर
जिनसे आँखों को मिला पाना है मुश्किल
वो गली में मुझको दिख जाते हैं अक्सर
करते हैं ईमान की बातें जो हमसे
एक बोली में ही बिक जाते हैं अक्सर
जिन के घर की हैं दिवारें आसमाँ तक
उनके घर तूफ़ा में ढह जाते हैं अक्सर
जो हमें दे जाते हैं सारी विरासत
आदतें भी वो दे ही जाते हैं अक्सर
प्यार की तौज़्ही जिन्हें मालूम ना हो
प्यार वो ही तो किया करते हैं अक्सर
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Before
शायरों की बुरी आदत है अक्सर
क़ैद करते हैं कुछ लफ़्ज़ों में मंज़र
और बातों को भुला देते हैं लेकिन
फ़लसफ़ों को ही लिखा करते हैं अक्सर
हम तो मैख़ाने को जाते ही नहीं हैं
तेरी आँखों से पिया करते हैं अक्सर
जिनकी बातों में कोई भी दम नहीं है
वो ख़ुदा की ही क़सम खाते हैं अक्सर
पैरहन अपने बनाते देखा जिनको
ज़ख़्म भी अपने सिया करते हैं अक्सर
जिनसे आँखें मिला पाना है मुश्किल
गली में मुझको दिख जाते हैं अक्सर
करते हैं बातें जो ईमान की हमसे
एक बोली में बिक जाते हैं अक्सर
जिनके घर की दीवारें आसमाँ तक
वो ही तूफ़ा में ढह जाते हैं अक्सर
जो हमें दे जाते हैं सारी विरासत
आदतें भी वो दे जाते हैं अक्सर
प्यार क्या है जिन्हें मालूम नहीं है
प्यार वो ही तो किया करते हैं अक्सर

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