बात कहने न सुनने समझने की है
बात ये बात में न उलझने की है
बात की बात के तेरी धड़कन को मैं
सुन सकूं मेरी धड़कन को तू सुन सके
बात इतनी सी है
क्या मुनासिब है क्या है रवायत यहाँ
पीढ़ी दर पीढ़ियों तक जो कहता रहा
पर मुनासिब था तब जो ये किसको पता था
मुनासिब रहेगा हमेशा यहाँ
बात इतनी सी है
है मेरी नाक तुझसी मेरी आँख तुझसी
मेरे हाथ तुझसे मेरी भूख तुझसी
धरम और मज़हब ने कब तुझसे मुझको
अलग था बताया ज़रा ये बता
बात इतनी सी है
चाँद सूरज सितारे या फिर आसमां
ज़िन्दगी सबको देते हैं इक सी यहाँ
कुइ पंछी कभी भी किसी और पंछी
को कहता नहीं मैं यहाँ तू वहाँ
बात इतनी सी है
जीभ पे ज़ायक़ा तो सभी का है इक सा
नमक कोई मीठा तो कहता नहीं
ये दिल चाहे कितनी करे ऐहतरामी
मगर बे लिहाज़ी भी सेहता नहीं
बात इतनी सी है
तू सच है तो सच ये भी है के कोई
झूठ की डोर को है संभाले हुए
अगर झूठ ही न हुआ करता तो क्या तू
दीखता कभी दिल जलाते हुए
बात इतनी सी है
बात कहने न सुनने समझने की है
बात ये बात में न उलझने की है
बात की बात के तेरी धड़कन को मैं
सुन सकूं मेरी धड़कन को तू सुन सके
बात इतनी सी है

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