Bahr: 1222 1222 122
ये किसने खुदकुशी की बात कह दी
जो ज़िम्मेदारियों से डर चुका है ?
वो बातें बे वजह दोहरा रहा है
जो करना है उसे वो कर चुका है
नहीं है जड़ से कोई रब्त उसका
वो अपनी शाख़ से ही झर चुका है
ज़रूरत अब नहीं उसकी किसीको
वो पीला पड़ गया है सड़ चुका है
नहीं है पीठ में उसके भी हड्डी
तभी उसका यहाँ पे सर झुका है
तड़पता है वो साँसों के लिए तो
उसे कह दे कोई वो मर चुका है

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