ये कौन है जो मुझको बांध बांध लाता है
ये कौन है जो मुझको रोज़ बेच आता है
नफे की चाहतों में कौन यूँ दिवाना है
ये कौन है जो मुझको केमिया खिलाता है
ये किसने मुझको जंगलों से खैंच लाया है
ये किसने बार बार ज़ुल्म मुझपे ढाया है
ये कौन ब्रह्म ब्रह्म कहके ढोंग करता है
ये कौन है जो रात दिन मुझे सताता है
ये कौन है जो अपने पाँव पे खड़ा नहीं
ये कौन है जो मेरी जूतियाँ बनाता है
निचोड़ कर के मेरी चर्बी खूब फूले है
ये कौन झूठ मूठ माँ मुझे बुलाता है
मैं सोचती हूँ सोचना इसे कब आएगा
ये कब तलक यूँ होश में ही आ न पाएगा
के कैसे बिन मेरे ये रात दिन गुज़ारेगा
ये कर्ज कैसे मेरे दूध के उतारेगा
मैं जानवर हूँ झूठ मूठ मुझको माँ ना कहो
ये जो क़ुदरत है इसके साये तले तुम भी रहो
ज़रा कोशिश तो करो खुद के दम पे जीने की
अपनी बैसाखी बना तुम मुझे कुरबाँ ना करो
है तुमसे एक गुज़ारिश ये मुझे कहने दो
के मुझे धूप छाँव बर्फ खुद ही सहने दो
मुझे नहीं हैं ख्वाहिशें तुम्हारे चौखट की
मैं जानवर हूँ मुझे जानवर ही रहने दो

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