ज़िन्दगी ज़िन्दगी हर तरफ ज़िन्दगी
लाख़ कुनबों का है ये शजर ज़िंदगी
दौर है मुख़्तसर आरज़ू ऐं बड़ी
मौत से मौत तक का सफ़र ज़िंदगी
[शजर = Tree, दौर = Time, मुख़्तसर = small, आरज़ू = desire]
वक़्त के छोर पर जो विदा कर चले
फिर उसी राह पर मुंतज़र ज़िंदगी
[मुंतज़र = इंतज़ार में ]
सबकी आँखों से देखे सुने कान से
बात 'ज़ाहिर' करे उम्र भर ज़िंदगी
फ़िक्रे अंजाम से है परेशान तू
किसकी नज़रों में है सर बसर ज़िंदगी
क्या है अच्छा बुरा पाक बे काएदा
इन सवालों से है बेख़बर ज़िन्दगी
हर सफ़र के किनारे ख़रीदी हि थी
इक नई ज़िन्दगी बेचकर ज़िन्दगी
नाम कर ले मगर एक दिन ये तुझे
कर ही जाएगी फिर गुमशुदा ज़िंदगी
मौत के बीच में है अमर ज़िंदगी
[नज़रिया = point of view]
आग पानी हवा का घुलन भर है ये
है धड़कती हुई साँस भर ज़िंदगी

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