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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Thursday, December 12, 2024

हिना

सहर हुई है तो चेहरा निखर चुका होगा
वो मेरि हर्फ़ गरी से उबर चुका होगा
नशा कभी न कभी तो उतर ही जाता है 
खुमार प्यार का अब तक उतर चुका होगा
[हर्फ़ गरी = लिखने का काम, खुमार = hangover]


जगह बची न थी मेरी हिना कि रस्मों तक 
तमाम नाम से वो हाथ भर चुका होगा
[हिना = Mehandi]

जिस एक गुल पे फ़िदा है अभी तलक ये दिल
वो सच में और किसी का ही हो चुका होगा

बस इक शजर जो मेरा है झुका है बाग़ों में
गुज़रता देख उसे ही शजर झुका होगा
[शजर = Tree]

गली कि खुश बू ये कहती है वो ही आया था
इधर की ओर से चलकर उधर मुड़ा होगा

सवाल तुक का करो तुम जहाँ से दुनिया से
जवाब मुझसे तो 'ज़ाहिर' है बे तुका होगा
[तुक = Logic]

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