Bahr: 212-212-212-212
हम भि हैं अजनबी तुम भि हो अजनबी
रास्ते अजनबी मंज़िलें अजनबी
सोचा हम ही चलो बात कर लें जहाँ
है सफ़र अजनबी हर नज़र अजनबी
हमने सोचा बोहोत और पाया यही
हर किसी तौर पर हर कोई अजनबी
ज़ाइदों के लिए बारहा ही रहा
है ज़हन अजनबी और बदन अजनबी
[ज़ाइद = छोटे बच्चे, बारहा = हमेशा से]
ये जो पहचान है ये भी मिट जाएगी
दर-बदर रूह भटकेगी फिर अजनबी
दीद की बात कहता है 'ज़ाहिर' सुनो
ज़िन्दगी अजनबी मौत भी अजनबी
[दीद = philosophy]
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
सीख लेती है एहले हुनर अजनबी
घर बसाने की खातिर चली जाती है
हो जहाँ पर की दीवारो-दर अजनबी
हाल तेरा जो है वो पता है मुझे
माना तकदीर का है ज़हर अजनबी
छोड़ दो वक़्त को वक़्त के हाल पर
है फ़िकर अजनबी चारगर अजनबी
[चारगर = solution दिलाने वाला]

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