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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Friday, January 24, 2025

होता है

मैं ये सुनता हूँ के इंसान में सब होता है
फिर जो खोता है यहाँ खुद से ही सब खोता है

बेसबब फिरता है दुनिया की तलब गारी में
फिर ये होता है के दुनिया का ही सब होता है

पहले आदाब से तस्लीम रवायत में रहे
फिर ये होता है के ख़ुद से ही अदब होता है

दिल तो बेहिस की तरह कल पे टला रहता है
फिर ये होता है के कल आज से अब होता है

ऐसा लगता है के सब दुनिया को 'ज़ाहिर' कर दूँ 
फिर ये होता है के रोने का सबब होता है

फिर किसी खोज में निकले है कहीं पर तनहा
फिर ये होता है के खुद में ही वो रब होता है

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