किसी ने ये पूछा मुझे कल कहीं
कहीं मुझको तेरा नशा तो नहीं
नहीं है नशा कह तो डाला मगर
बता उसका कहना सही तो नहीं
सही तो नहीं ऐसा लगता नहीं
मगर तुम किसी से ये कहना नहीं
मुझे भी ज़रा तू बता तो सही
कहीं तुझको मेरा नशा तो नहीं
न जाने क्यूँ दिल में ये रफ़्तार है
न जाने के किस्से किसे प्यार है
तेरी धक् मेरी धक् से धक्-धक् हुई
कहीं हमको कोई नशा तो नहीं

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