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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Thursday, February 29, 2024

नशा

किसी ने ये पूछा मुझे कल कहीं 
कहीं मुझको तेरा नशा तो नहीं 
नहीं है नशा कह तो डाला मगर 
बता उसका कहना सही तो नहीं 

सही तो नहीं ऐसा लगता नहीं 
मगर तुम किसी से ये कहना नहीं 
मुझे भी ज़रा तू बता तो सही 
कहीं तुझको मेरा नशा तो नहीं 

न जाने क्यूँ दिल में ये रफ़्तार है 
न जाने के किस्से किसे प्यार है 
तेरी धक् मेरी धक् से धक्-धक् हुई 
कहीं हमको कोई नशा तो नहीं 

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