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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Tuesday, April 9, 2024

सदा

देखा जो उन्हें बाग़ में महसूस ये हुआ 
रंगीन था ये बाग़ महकता कभी न था 
सूरत तो उनकी दूर तक मशहूर थी मगर 
चेहरे से पहले हुस्न टपकता कभी न था 
[बाग़ = garden], [हुस्न = beauty]

नज़रों से देखते तो थे, इस बार बात की 
आँखों में पहले आब चमकता कभी न था 
पहले तमीज़ तीर की होती थी कुछ अलग 
करता था दिल पे चोट, गुज़रता कभी न था 
[आब = water]

दिल होश में रहता था शराबों के शहर में 
कितने भी जाम हों ये बहकता कभी न था 
दिल की रग़ों में जोश था लेकिन ये इस क़दर 
पैग़ाम देखने को तड़पता कभी न था 
[जाम = peg], [रग = veins], [पैग़ाम = messege]

देखी है क़ायनात में क़यामत से ज़ीनातें 
दो पल भी देखने को ठहरता कभी न था 
उनकी सदा सुनी है जबसे दिल को यूँ लगा 
दिल काम तो करता था धड़कता कभी न था 
[क़ायनात = universe], [क़यामत = doom day]

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