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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Tuesday, April 30, 2024

वेहम

जो हकीक़त है वो ख़ाबों के लिए खोते हैं 
ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 
असल में खाब का अंजाम ऐसा होता है 
दौड़ते भागते हम जागते न सोते हैं 

ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 

किसी के हैं बोहोत किसी के ख़ाब थोड़े हैं 
कौन बिखरे हुए ख़ाबों को फिर से जोड़े है 
हर कोई देखता ज़रूर है मगर फिर भी 

ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 

ख़ाब इक प्यास है हकीक़त से नहीं मिटती 
वो कहानी है जो किसी से भी नहीं मिलती 
ये वेहम उम्र भर हम शाम-ओ सहर बोते हैं 

ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 

फ़रेब

ज़रा संभल के चल यहां
फ़रेब आज़माएगा
जो दिल किसी को दे दिया
तो फिर ना हाथ आएगा

कहाँ ये लौट कर मिला
जो एक बार दे दिया
बरस गया फ़लक से जो
ना फिर फ़लक पे आएगा

ज़रा संभल के चल यहां
फ़रेब आज़माएगा

ये जंग दिल दिमाग की
ये जंग आब आग की
बुझा बुझा रहेगा तू
जो जंग हार जाएगा

जो दिल किसी को दे दिया
तो फिर ना हाथ आएगा

ज़रा संभल के चल यहां
फ़रेब आज़माएगा

Friday, April 26, 2024

ज़माने

ऐसा क्या देखा मेरी आँखों में 
के बस ही गए हो निगाहों में 
भला किसने तुमको बताया है  
के चाँद तारे हैं मेरी आँखों में 

बन के दरिया मैं जिसमें मिल जाऊँ 
वो समंदर है तेरी आँखों में 
माना घाटे का मेरा सौदा है 
पर मुनाफ़ा है तेरी आँखों में 

देखते हो जो एक टक तो बता 
ख्वाब कितने हैं मेरी आँखों में 
डर मुझे है के आँख सच ना कहे 
राज़ रहते हैं मेरी आँखों में 

ये जहां देख लिया देख लिया 
कोई जचता नहीं है आँखों में 
हर एक पल नया ज़माना है 
तुम ज़माने हो मेरी आँखों में 

||||| FEMALE
||||| MALE

रूठना तेरा

इस तरह से लूटना तेरा 
दिल को छू जाए रूठना तेरा 
याद रह जाए यूँ मनाने पर
प्यार करने पे टूटना तेरा 

जो सज़ा चाहो वो सज़ा दे दो 
मुझको मंजूर कूटना तेरा 
बेरुखी मुझको करती है मायूस 
अब जरूरी है फूटना तेरा 

दूर जाने की सोचना भी नहीं 
सह न पाऊँगा छूटना तेरा 
सह न पाऊँगा छूटना तेरा 
सह न पाऊँगा छूटना तेरा 

Thursday, April 25, 2024

गँवार

आजकल ख़ुद से ही फ़रार हैं हम 
कहीं मसरूफ़ लगातार हैं हम 
लाख कह लो के तुम नहीं मेरे 
फिर भी तेरे ही बार बार हैं हम 

रूठ कर रुख भी ऐसे मोड़ लिया 
और कहते हो ऐतबार हैं हम 

तुम कहो ना कहो पता है हमें 
तेरे ही दिल में गिरफ़्तार हैं हम 

तेरी नज़रों की खोज लाज़िम है 
इत्तेफ़ाक़न बड़े मक्कार हैं हम 

इस क़दर तेरी बेक़रारी देख 
लोग समझेंगे इंतज़ार हैं हम 

दिल ये दुखता है इस हक़ीक़त से 
तेरी नज़रों में गुनाहगार हैं हम 

देख तफ़्सील से सुकूं से ज़रा 
आईने में तेरा सिंगार हैं हम 

शहर के तौर यहाँ बे ढब हैं 
इन रिवाज़ों में तो गँवार हैं हम 

Wednesday, April 24, 2024

जो तू है वो मैं भी हूँ

जो ऊपर आसमाँ देखूं तो लगता है के पागल हूँ 
जो नीचे फर्श पे देखूं तो लगता है के घायल हूँ 
जो आँखें बंद कर बैठूं तो लगता है के कायर हूँ 
जो ख़ुद में झांकता हूँ तो 
समझता है के मैं तुम हूँ 
समझता है के मैं तुम हूँ 
समझता है के मैं तुम हूँ 

तुझे कोई नाम कैसे दूँ 
तुझे कोई रूप कैसे दूँ 
तुझे कैसे कहूँ कुछ भी 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 

मैं पागल हूँ मैं घायल हूँ 
मैं कायर हूँ समझता हूँ 
मगर खुद को ये कहकर मैं 
तुझे बदनाम कैसे करूँ  
तुझे बदनाम कैसे करूँ 
तुझे बदनाम कैसे करूँ 

मैं अब से सोचता हूँ खुद से मिन्नत खुद ही करता हूँ 
मुझे जो चाहिए खुद मैं ही खुद से मांग सकता हूँ 
ये मुश्किल है के आसान है 
आज़मा कर ज़रा देखूं 
आज़मा कर ज़रा देखूं 
आज़मा कर ज़रा देखूं 

तुझे कोई नाम कैसे दूँ 
तुझे कोई रूप कैसे दूँ 
तुझे कैसे कहूँ कुछ भी 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 
के जो तू है वो मैं भी हूँ  

Monday, April 22, 2024

साक़ी

रिश्ते तमाम हैं पर मिलता कोई नहीं 
ग़लती से मिल भी जाए तो जुड़ता कोई नहीं 
दिल देके सबको देखा साक़ी तेरी तरह  
सबका ये हो चुका है इसका कोई नहीं
[साक़ी = one who serves drinks / शराब पेश करने वाले]

रिश्तों की आस खून के क़तरों से कहाँ है 
दुनिया में वो भी ख़ुश हैं जिनका कोई नहीं 

कैसी ये चोट दी है क्या दिल का हाल है 
के ज़ख्म तो गहरा है निशाँ कोई नहीं 

कैसा ये शहर तेरा रहते कहाँ हैं लोग 
रस्ते तमाम हैं यहाँ मकां कोई नहीं 

दिल डूबता है लेकिन देखो ये बेबसी 
नज़दीक यहाँ मेरे तिनका कोई नहीं

इस शोर शराबे में किससे कहे कोई 
सब बोलते हैं अपनी सुनता कोई नहीं

दिल देके सबको देखा साक़ी तेरी तरह  
सबका ये हो चुका है इसका कोई नहीं

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...