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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Friday, May 31, 2024

दिल चाहता है

आईने में चेहरा है 
चेहरे पे आँखें हैं 
आँखों ने देखा 
जिसे दिल चाहता है 

दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

दिल में जो धड़कन है 
धड़कन में चाहत है 
चाहत वही है 
जिसे दिल चाहता है 

दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

दुनिया डराती है 
धड़कन बताती है 
वो ही सही है 
जो भी दिल चाहता है 

दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

आँखों में नींदें हैं 
नींदों में सपने हैं 
सपनों में वो हैं 
जिसे दिल चाहता है  

दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

दौलत लुभाती है 
शोहरत बुलाती है
रहना वहीं है 
जहाँ दिल चाहता है 

दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

Wednesday, May 29, 2024

अब चलो जाओ

जब भी मिलते हो तो कहते हो 'अब चलो जाओ'
इतना आसां नहीं ये बात फिर ना दोहराओ  
हम समझते हैं के हम कुछ भी समझते ही नहीं 
और ये चाहत है के ये बात तुम समझ जाओ 

इस गली भूल कर आना भी अब नहीं होता 
आँख पथरा गई हैं अब तो कुछ तरस खाओ 
बात ये है के अगर अब कोई बहाना भी नहीं 
ये बता कर के मेरी आँख नम ही कर जाओ 

Monday, May 27, 2024

कुछ बातें

कुछ बातें 
तो रह जाती हैं बातों में 
जो खुद से ही
कभी कहते हैं रातों में 

धुंधली सी
आँखों की बरसातों में 
कुछ बातें 
झूमती हैं हवाओं में 

रह जाती हैं कुछ बातें 
कह जाती हैं कुछ रातें 
और हम तो बस तुझको ही हैं दोहराते 

दोहराते ...... दोहराती हैं कुछ बातें 

कुछ बातें
याद आती सन्नाटों में 
मुझे पागल 
बना जाती जज़्बातों से

बड़ी उलझन 
शिकस्तों से और मातों से
हैं कुछ बातें
अटक जाती हैं नातों मे 
 
हारना तो नहीं मुझे 
जीतना भी नहीं मुझे 
तो कैसे मैं कहूँ तुझे 

कि आ जा रे ...... तू आ जा रे, सुना जा रे 

तेरी ऐसी ... ही ... कुछ बातें ... कुछ बातें

Sunday, May 26, 2024

फिर वही

फिर भूख़ लगी मन को रवानी वही 
फिर जिस्म की बदन की कहानी वही
मिट्टी के फिर खिलौनों से खेले ज़िंदगी
और खेल खेलने की परेशानी वही 

फिर दिल में लगी आग तूफ़ानी वही 
फिर क़ैफ़ियत की प्यार की नादानी वही 
कुछ पा लिया था खो कर लेकिन तलाश में
खो जाने की है बे-इत्मिनानी वही 

फिर याद आ जाने की निशानी वही 
फिर भूलने की आदत पुरानी वही  
हर शक्ल अलग है और लोग मुख़्तलिफ़  
बचपन है बुढ़ापा है जवानी वही 

फिर बीज ज़मीं धूप और पानी वही 
फिर परवरिश वही निगरानी वही 
तकदीर के फ़सानों की मिसालें तमाम 
करता है हर कोई बाग़ बानी वही 

Thursday, May 23, 2024

हदें

कोशिशों पर भी ये तकदीर तो बदल ना सकी 
आग को घर भी बनाया मगर ये जल ना सकी 
सबक़ पढ़ा था संभलने का मगर हम क्या करें 
हम अपनी हद में रहे पर हदें संभल ना सकी 

Tuesday, May 21, 2024

मुराद

वो कहते रहते हैं अक्सर कभी तो याद करो 
और हम कहें के भूलने की तुम फ़र्याद करो 
राग़ों मे दौड़ते फिरते हैं वो लहू की तरह 
ऐ खुदा अब मेरे जसबे को तुम मुराद करो 

मेघ

मेघ के वर्षा जल से सींचो 
सींचो जड़ और तन
चक्षु के जल से फिर सींचो
अपना आत्मन

बिजुरी चमके सत्य दिखावे 
सत के कर दर्शन
कभी कभी आए जीवन में
वर्षा का मौसम

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...