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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Saturday, March 30, 2024

भूला

मसरूफ़ियत में कई काम भूल जाता हूँ 
मिलकर करना है सलाम भूल जाता हूँ 
दिलचस्प हूँ और अनोखा बोहोत हूँ 
खाने हैं मुझको बादाम भूल जाता हूँ  

फिर से चल पड़ता हूँ लंबे सफर पे 
हासिल किए मैं मक़ाम भूल जाता हूँ
रिश्तों से अक्सर पुकारता हूँ सबको
क्या है के सबके मैं नाम भूल जाता हूँ 

मैययत दिवाली या होली के शादी 
लोगों में हूँ बदनाम भूल जाता हूँ 
सीने से लगकर ही मिलता हूँ सबसे 
दुश्मन मैं अपने तमाम भूल जाता हूँ 

आज़ाद कोई भी होता नहीं है 
याद दाश्त का हूँ ग़ुलाम भूल जाता हूँ 
अपनी सफाई में क्या ही कहूँ मैं 
खुद पर लगे इल्ज़ाम भूल जाता हूँ 

सोचा हुआ लिखना पड़ता है अब तो 
जीवन की अब है ये शाम भूल जाता हूँ 
पढ़ना पड़ेगा मुझे ये भी लिखकर 
खुद के लिखे मैं कलाम भूल जाता हूँ 

1 comment:

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