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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Saturday, June 22, 2024

गुलशन

भीनी सी सौंधी हवा है 
मन को जो महका रही है 
बोझिल सी साँसों को मेरी 
हौले से बहला रही है 

सूरज की किरणों को छूकर 
खिल जाए बाग़ों की कलियाँ 
जज़्बों को मेरे जगाकर 
महके इरादों की गलियाँ
दिलकश हवाएं भी इजहार से 
गुलशन को लहका रही हैं ||  भीनी सी सौंधी हवा है  

क़ुदरत बनाती है नमे 
पंछी उसे गुनगुनाते 
मदहोश करता है आलम 
धुन ये सुनाते सुनाते 
बादल की लड़ियाँ आकाश के
नज़ारों में इठला रही हैं

भीनी सी सौंधी हवा है 
मन को जो महका रही है 
बोझिल सी साँसों को मेरी 
हौले से बहला रही है 

-- partnered creation by दीपाली & विवेक पोहरे 

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