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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Friday, August 16, 2024

रब

Bahr" 
  • 1222
  • 1222
  • 1222
  • 1222

  • समझने की जो बातें थी उन्हें मैं बद समझ बैठा 
    जो गिरहन का अँधेरा था उसे मैं शब् समझ बैठा 

    पहन कर मुस्कराहट सब यहाँ बाहर निकलते हैं 
    मैं बाज़ारू तवज्जोः को लिहा ज़ो दब समझ बैठा 

    क्या मैं मासूम था या फिर ये मेरी बेवक़ूफ़ी थी 
    किसी का हाथ देखा तो उसे मैं हद समझ बैठा 

    यहाँ इंसान चूहों की तरह दौड़ाए जाते हैं 
    हर इक इंसान लालच में तलब से दौड़ने बैठा 

    उन्हें कहना उन्हें सुनना बड़ा पेचीदा लगता है 
    के उनकी बात नाहक़ ही मैं कब से सच समझ बैठा 

    वो माली का जो बेटा है बड़ा नादान बच्चा है 
    जिसे देखा बड़ी गाड़ी में बस साहब समझ बैठा

    यही मैं सोचता हूँ के कहाँ और कब समझ बैठा 
    बना कर के मशीनें खुद को इंसां रब समझ बैठा  

    बड़े नुस्खे नहीं थे ज़िन्दगी में कामयाबी के
    बड़ी छोटी सी ख्वाहिश थी जिसे मैं सब समझ बैठा

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    समझने की जो बातें थी उन्हें गलत समझ बैठा 
    जो गिरहन का अँधेरा था उसे मैं शब् समझ बैठा 

    मुस्कराहट पेहेन कर सब यहाँ बाहर निकलते हैं 
    मैं बाज़ारू तवज्जोः को लिहाज़ अदब समझ बैठा 

    क्या मैं मासूम था या फिर ये मेरी बेवक़ूफ़ी थी 
    किसी का हाथ देखा तो उसे मदद समझ बैठा 

    यहाँ इंसान चूहों की तरह दौड़ाए जाते हैं 
    हर इक इंसान लालच में दौड़ने को तलब बैठा 

    उन्हें कहना उन्हें सुनना बड़ा पेचीदा लगता है 
    के उनकी बात नाहक़ ही मैं कब से सच समझ बैठा 

    एक बेटा है माली का बड़ा नादान बच्चा है 
    गाड़ियों में जिन्हें देखा उन्हें साहब समझ बैठा 

    यही मैं सोचता हूँ के कहाँ और कब समझ बैठा 
    बना कर के मशीन इंसान खुद को  रब समझ बैठा 
     
    पूछते हैं लोग अक्सर कामयाबी के कुछ नुस्खे 
    बड़ी छोटी सी ख्वाहिश थी जिसे मैं सब समझ बैठा

    Wednesday, August 14, 2024

    बात

    बहरों के सामने तू आवाज़ क्या करेगा 
    ख़ुद उड़ सके न उनको आज़ाद क्या करेगा 

    चादर को ओढ़ते हैं अपना क़फ़न समझ कर 
    तू उनसे ज़िन्दगी की फ़रियाद क्या करेगा 

    इल्ज़ाम हर किसी पर लाज़िम नहीं है क्यों कि  
    जो साथ ही नहीं था वो याद क्या करेगा 

    मायूस है वो मुझसे ये सोच कर के मेरी 
    बर्बाद ज़िन्दगी को बर्बाद क्या करेगा 

    रेहमत उसे न बक्शो वेह्शी है वो दरिंदा 
    पहले ही मर चुका है जल्लाद क्या करेगा 

    साँसें ये चल रही हैं कह दे तू जो है कहना 
    जो सांस रुक गई तो फिर बात क्या करेगा 

    Sunday, August 11, 2024

    सादा दिली

    तस्वीर कैसी कैसी बनाता है आइना - २ 
    ख़ाबों के जैसे अक्स दिखाता है आइना 
    तस्वीर कैसी कैसी बनाता है आइना 

    महफ़िल में इक दफ़ा भी मुझे देखता नहीं 
    तन्हाईयों में मुझको मनाता है आइना
    ख़ाबों के जैसे अक्स दिखाता है आइना 
    तस्वीर कैसी कैसी बनाता है आइना 

    मुझसे ही मांगता है रौशनी के सौ दिए 
    एहसान मेरे मुझको गिनाता है आइना 
    ख़ाबों के जैसे अक्स दिखाता है आइना 
    तस्वीर कैसी कैसी बनाता है आइना 

    रखा था कब से हमने संभाले जिस आग को 
    आंसू की शक्ल उसको बुझाता है आइना 
    ख़ाबों के जैसे अक्स दिखाता है आइना 
    तस्वीर कैसी कैसी बनाता है आइना 

    बातें बनाओगे वो भी तुम इसके सामने?
    दुनिया की सारी बातें जानता है आईना
    ख़ाबों के जैसे अक्स दिखाता है आइना 
    तस्वीर कैसी कैसी बनाता है आइना 

    सादा दिली मगर ये किसी को न आ सकी
    कोई न चाह कर भी बन सका है आइना 
    ख़ाबों के जैसे अक्स दिखाता है आइना 
    तस्वीर कैसी कैसी बनाता है आइना 

    Sunday, August 4, 2024

    आते जाते

    मुझसे,
    बोहोत लोग मिलते हैं यूँ ही आते जाते 
    एक तुम ही मिले मुझसे हँसते हँसाते - 2
    कैसे,
    मदहोश आँखों से हम खुद को बचाते 
    मेरे, 
    दोस्त मुझसे कहते हैं जलते जलाते - 2 

    हरदम ही गुनगुनाना हरदम ही मुसकुराना 
    तुम कैसे ढूंढते हो हंसने का कोई बहाना 
    अच्छा,
    अब तो बताओ के तुम कैसे फ़रमाते
    अगर मैं रूठ जाती मुझको कैसे मनाते 

    कैसे,
    मदहोश आँखों से हम खुद को बचाते 
    मेरे, 
    दोस्त मुझसे कहते हैं जलते जलाते - 2 
    मुझसे,
    बोहोत लोग मिलते हैं यूँ ही आते जाते 
    एक तुम ही मिले मुझसे हँसते हँसाते - 2

    पैग़ाम देखा तेरा तो फिर याद आ गया रे 
    मैं कुछ,
    भूल गया गलती से और पकड़ा गया रे 
    फिर सोचा अब तो तुझको मनाना पड़ेगा 
    और ये गीत बन गया देखो मनाते मनाते 

    मुझसे,
    बोहोत लोग मिलते हैं यूँ ही आते जाते 
    एक तुम ही मिले मुझसे हँसते हँसाते - 2
    कैसे,
    मदहोश आँखों से हम खुद को बचाते 
    मेरे, 
    दोस्त मुझसे कहते हैं जलते जलाते - 2 

    हमनशीं

    ये रातें, दिल की बातें घुल गई हैं ज़िंदगी में
    बड़े काम आएगी ये हसीं बातें आशिक़ी में

    ये रातें, दिल की बातें ...

    मंज़र तो आईना है धड़कते से दो दिलों का 
    ये दिल सुन रहा है एहतराम मंजिलों का
    उलझनों में मत उलझना बोहोत कम ज़िंदगी है 
    अपना प्यार बंदगी है बेशुमार ज़िंदगी है 

    ये रातें, दिल की बातें ...

    जब अंधेरा आए तो तुम मेरे साथ साथ रहना 
    हम साथी हर जनम के इस जनम भी साथ है ना 
    ता उम्र रहना चाहे दिल ऐसी बेखुदी में 
    मैं तेरी हमसफ़र हूँ तू मेरा हमनशीं है 

    ये रातें, दिल की बातें घुल गई हैं ज़िंदगी में
    बड़े काम आएगी ये हसीं बातें आशिक़ी में

    ये रातें, दिल की बातें ...
    ये रातें, दिल की बातें ...

    Duet Song: Female, Male, Both

    Saturday, August 3, 2024

    जवाब

    क़िस्सों को कहानी में ढलते हुए देखा 
    और ऐसे हक़ीक़त को जलते हुए देखा 

    'इंसान हूँ' इंसान ये कहते हैं सर-ए-आम 
    कितनों को मैंने जिस्म बदलते हुए देखा 

    करते हैं जो शफ़्क़त की बातें बड़ी बड़ी 
    एक फूल उन्हें कल ही कुचलते हुए देखा
     [ शफ़्क़त = करुणा, compassion ]

    कल रात से भूखा था मैं अब भूख मर गई  
    इक तिफ्ल को खाने को तरसते हुए देखा
     [ तिफ़्ल = बच्चा, child ]

    एक बाप सर झुका के सुन रहा था कोई बात 
    उसे खून के प्यालों को निगलते हुए देखा 

    नज़रों के सवालों का जब जवाब ना मिला 
    मैंने तुझे नज़रों से उतरते हुए देखा 

    Thursday, August 1, 2024

    कभी

    क़ता:

    भूल जाना मुझे आसां तो नहीं 
    किसको झूठी क़ता सुनाती है 
    क्या अंधेरा भी ऐसे होता है 
    दो पहर में दिया बुझाती है 

    Bahr (2122 1212 112)
    ग़ज़ल:
    साँस लेता हूँ हर किसी की तरह 
    एक आदत हूँ ज़िंदगी की तरह

    आदतन सबको भूल जाता हूँ मैं 
    याद आते हो तुम कमी की तरह 

    मश्ग़ला बात क्यों करे है तेरी 
    जाने पहचाने आदमी की तरह 

    मैं ज़मी पर हूँ ख़ाक बन के पड़ा 
    तुम फलक पर हो चाँदनी की तरह 

    फिर नया दिन है फिर सवाल कई 
    फिर मैं उलझा हूँ हर किसी की तरह 

    इक दफा फिर से प्यार कर लो कभी 
    फिर झटक देना तुम दरी की तरह 

    हो ना हो तुमको याद हूँ मैं अभी 
    जैसे था तेरा मैं कभी की तरह 

    ख़ामोशी

    ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...