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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Thursday, April 11, 2024

फ़रिश्ता

कभी कभी बग़ैर बात के मचलता है 
बोहोत मुश्किलों से दिल मेरा संभालता है 
बस इक दवा है मेरे पास ताज़गी के लिए 
ख़याल लिख के कलामों से दिल बहलता है 

उम्मीद रखना है फ़ुज़ूल ये हक़ीक़त है 
कहाँ किसी के लिए कोई भी बदलता है 
कभी तो घूँट भर का खून पी के देख ज़रा 
के कोई कैसे ज़ख्म अपने ही निगलता है 

यूँ गोल गोल सी बातों से मुझे ख़ुश न करो 
वो और होंगे जिन्हें सच में झूठ चलता है 
जला के रौशनी करोगे? मैं चराग़ नहीं 
मगर छुए जो मुझे अपने हाथ मलता है 

ये वक़्त झूठ है झूठी ये सब कहानी है 
ये चाँद झूठ मूठ डूबता निकलता है 
वो आसमाँ में सितारों का टूटना देखे 
एक बच्चा ख़ुशी से नाचता उछलता है 

ये जिस्म गर्म है अभी, अभी तो बात करो 
अभी तो मेरा हौसला भी उसे खलता है 
अभी न आएगा कोई भी ये पता है मुझे 
अभी तो मौत का फ़रिश्ता मुझसे डरता है 

Wednesday, April 10, 2024

बिसरी सी महक

धूप आती है तो बारिश भी साथ लाती है 
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है
बाद बारिश के यहाँ बाढ़ सी आ जाती है  
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है 

निशाँ कुछ भी तो नहीं 
निशाँ कुछ भी तो नहीं 
निशाँ कुछ भी तो नहीं हैं तेरे अब इस घर में  
वो जगहा खाली तेरे गीत गुनगुनाती है 
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है 

नींद आती है बोहोत 
नींद आती है बोहोत 
थकन से सारे दिन के नींद तो आती है बोहोत 
कोई घुँघरू की छनक रात भर जगाती है 
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है 

भूलना है तुझे 
भूलना है तुझे 
भूलना है तुझे ये कह के भूल जाता हूँ  
तेरी यादें क्या मेरी उम्र भर का साथी है 
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है

मुट्ठियाँ बंद करूँ 
मुट्ठियाँ बंद करूँ 
मुट्ठियाँ बंद करूँ कुछ भी ना माँगूँ रब से 
कोई बिसरी सी महक याद कुछ दिलाती है  
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है

न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है

Tuesday, April 9, 2024

सदा

देखा जो उन्हें बाग़ में महसूस ये हुआ 
रंगीन था ये बाग़ महकता कभी न था 
सूरत तो उनकी दूर तक मशहूर थी मगर 
चेहरे से पहले हुस्न टपकता कभी न था 
[बाग़ = garden], [हुस्न = beauty]

नज़रों से देखते तो थे, इस बार बात की 
आँखों में पहले आब चमकता कभी न था 
पहले तमीज़ तीर की होती थी कुछ अलग 
करता था दिल पे चोट, गुज़रता कभी न था 
[आब = water]

दिल होश में रहता था शराबों के शहर में 
कितने भी जाम हों ये बहकता कभी न था 
दिल की रग़ों में जोश था लेकिन ये इस क़दर 
पैग़ाम देखने को तड़पता कभी न था 
[जाम = peg], [रग = veins], [पैग़ाम = messege]

देखी है क़ायनात में क़यामत से ज़ीनातें 
दो पल भी देखने को ठहरता कभी न था 
उनकी सदा सुनी है जबसे दिल को यूँ लगा 
दिल काम तो करता था धड़कता कभी न था 
[क़ायनात = universe], [क़यामत = doom day]

Sunday, April 7, 2024

नमी

मेरे चेहरे से न तू पढ़ मुझे 
मेरा चेहरा जिल्द-ए-किताब है 
मेरी ज़िन्दगी के सफ़े पलट 
फिर पूछ जो भी सवाल हैं 
[जिल्द-ए-किताब = book cover], [सफ़े = pages]

न करो ये दिखने की कोशिशें 
यहाँ दिखना चश्मे सराब है 
तेरी रौशनी को ख़बर नहीं 
यहाँ ज़ुल्मतों के हिजाब हैं 
[चश्मे सराब = like mirage], [
ज़ुल्मतों के हिजाब = cover of darkness]

मेरे ज़ख्म का ना हिसाब ले 
मेरे ज़ख्म तो बे-हिसाब हैं 
तू कहे तो और सवाँर लूँ 
मेरे ज़ख्म मेरा शबाब है
[
शबाब = youth]

कोई कह रहा था के ज़िन्दगी 
एक ला जवाब सा ख़्वाब है 
इस ख्वाब में सच कुछ नहीं 
और जिस्म सारे हबाब हैं
[
हबाब = bubble]

क्या कहूं मैं कैसे कहूं उसे 
मुझे दिखता कैसा ये ख़्वाब है 
कहीं नम सी आँख में खून है 
कहीं जुस्तजू में शराब है
[
जुस्तजू = desire]

Saturday, April 6, 2024

मार डाला

जिन्हें चाहतें थी तेरी चाहतों की 
तेरी हसरतों ने उन्हें मार डाला 
तेरी ज़ुल्फ़ की उलझनों से जो निकले
निगाहों ने तेरी उन्हें मार डाल 

तेरी खुशबू जैसा महकता है संदल 
तेरे तन बदन का सुखन है निराला 
जिन्हें तेरी आँखों ने देखा नहीं था 
अदाओं ने तेरी उन्हें मार डाला 

तेरे सुर्ख होंठों पे लफ्जों के झरने 
नहीं जिसने देखे अकल पे है ताला 
तेरे मयकदे तक न जो आ सके हों  
सदाओं ने तेरी उन्हें मार डाला  

Friday, April 5, 2024

बेचैन

तू कौन है 
तू कहाँ पे है

तू दिल में है
या जाँ 
में है
तुझे चाहता हूँ देखूँ आँखों से इक दफ़ा 

बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
तू कौन है कहाँ है किस देस मे बसा
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

तू मुझे तो जानता है अपना तू दर बता
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

तुझे सागरों में ढूंढा तुझे आसमा में ढूंढा
तुझे आशकी  
में ढूंढा तुझे बंदगी में ढूंढा
तुझे खुशबुओं 
में ढूंढा खामोशियों में ढूंढा
तुझे होश 
में भी ढूंढा बेहोशियों में ढूंढा 

दिखता नहीं कहीं तू ढूंढा है कहकशा
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

मेरी सांस में नहीं है मेरे खून में नहीं है
आवाज़ 
में नहीं है नाखून मे नहीं है 
तू किताब 
में नहीं है मजमून में नहीं है 
तू जुनून 
में नहीं है तू सुकून में नहीं है

फिर भी न जाने कैसे महसूस है किया
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

तेरी चाहतों में पागल तेरी ख्वाहिशों में घायल
दरिया से सूख कर मैं अब बन गया हूँ बादल
दीदार के लिए ही मैं तड़प रहा हूँ पल पल
तड़प रहा हूँ पल पल तड़प रहा हूँ पल पल

तू किसी को भी दिखा है या मुझे न दिख सका
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा


प्यार नज़र आता है

तू कहे या ना कहे मुझको समझ जाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 
मेरा ये दिल क्यूँ तुझे देख धड़क जाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 

तेरे बिन ना रह पाना, तू नहीं तो घबराना 
ख्वाबों में तुझे पाकर नींदों का उड़ जाना 
तेरा एहसास मेरी आस को बढ़ाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 

तेरी सूरत तेरी खुशबू ये हवा में तेरा जादू 
तेरा चलना तेरा रुकना करता है बेकाबू 
ये तेरा मजनू तेरे गीत गुनगुनाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 

तू कहे या ना कहे मुझको समझ जाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 
मेरा ये दिल क्यूँ तुझे देख धडक जाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...